Thursday, May 21, 2009

ये कार्टून.... इस टाइप के कवियों के नाम....


7 comments:

संजय बेंगाणी said...

भई किसी और को सुनाओ,या झरोखे वाले को पकड़ो... मैं ईलाज करता हूँ, स्वयं को अवसाद ग्रस्त नहीं करना.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मुझे भस्मासुर याद आ गया।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुनने वाले का अवसाद बढ़ाने को तो नहीं कहा था न !

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

लगता है कवियों ने आपको खूब सताया है. सहानुभूति है.

अविनाश वाचस्पति said...

फिर तो नकल
मार कर भी
जा सकती है
लिखी।

shyam jagota said...

netaon se dill bhar gaya jo ab kaviyon ki aisi taisi ker di bandhu !

shyam jagota said...

netaon se dill bhar gaya jo ab kaviyon ki aisi taisi ker di bandhu !

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