Thursday, April 23, 2009

आज कार्टून नहीं, मेरी प्रिय कवियित्री 'शिम्बोर्स्का' की एक कविता पढिये...


6 comments:

ravindra vyas said...

बहुत मौजूं और धारदार। आपको बहुत बहुत बधाई, कि आपने यह कविता चुनी और यहां पोस्ट की।

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

लिखा तो सच है . कोई अपनी गलती नहीं मानता . ईश्वर भी नहीं

Shikha Deepak said...

कटु सत्य बताती..............कविता।

राजीव जैन Rajeev Jain said...

सत्य

varsha said...

..yahin hum inse alag ho sakten hein.

अविनाश वाचस्पति said...

और खटमल भी

पूरी शिद्दत से

खून के लिए ही

बदन को खटखटाते।

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