मामूली सा कार्टूनिस्ट.
चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (madhya pradesh) में जन्म पाया.
पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग सीख रहा हूँ, एकलव्य की तरह.
कितना सीखा ये पाठक तय करें.
पढ़ाई-लिखाई के दौरान मिली तमाम डिग्रियों को भूल चुका हूँ मैं.
जीवन मैं कहीं काम नही आयीं.
कार्टूनिंग के अलावा और कुछ मैं कर ही नही सकता.
सच तो ये है कोई दूसरा काम मुझे आता भी तो नही.
ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर
में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के दुःख-दर्द को समझने की
और उस पीड़ा को साझा करने की कोशिश जारी है.....
कविता : होटल के इस कंबल में
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*जब भी किसी होटल में ठहरता हूं तो स्नानघर या ड्रेसिंग टेबल के आईने पर चिपकी
बिंदियां उस कमरे को घर बना देती हैं। अगर किसी होटल में यह सब ना हो तो लगता
है...
लिख ही डाला अंतिम वाक्य अंतिम बार
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लिखो, काटो...फिर लिखो, फिर काटो। इसका क्या कोई अंत है। अंतत: यही सोचकर
उपन्यास उत्तर वनवास का अंतिम वाक्य अंतिम बार लिख कर खुद को मुक्त किया। फाइनल
स्क्रिप...
वाह रे आपदा प्रबंधन
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अपना देश सचमुच भगवान भरोसे है और अपनका शहर तो सौ फीसदी भगवानजी की शरण में।
अब ये भगवानजी कौनसे वाले हैं अपन को आइडिया नहीं है पर यहां कोई लॉ एंड ऑर्डर
है न...
उड़ते हुए रूई के फाहे
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हमारा घर बहुत छोटा था। सदस्य ज्यादा थे। घर के लोगों के हाथ-पैरों पर खरोंचों
के निशान थे। हम जब भी घर में आते-जाते तो हमें घर में रखी टूटी आलमारी,
कुर्सी, ...
Habib Tanvir
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Habib Tanvir was one of the most popular Hindi playwrights, a theatre director, poet and actor. He is the writer of plays such as, Agra Bazar (1954) and Char...
7 टिप्पणियाँ:
बेहतरीन...
सर एक से बढ कर एक और जबरदस्त कार्टून। रावण की आड में आपने व्यवस्था से ले कर समस्याओं कर....जाने कितना कुछ कह दिया।
कमेंट की जरूरत ही नहीं... बस चुप.
bahut badhiya
तीन कार्टून, तीनों दमदार।
एक से बढ कर एक जबरदस्त कार्टून
बेहतरीन...
विजय दशमी पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
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